कानपुर में तैनाती के दौरान जुटाई 100 करोड़ की संपत्ति का आरोप
उत्तर प्रदेश पुलिस के एक अधिकारी पर भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति अर्जित करने का बड़ा मामला सामने आया है।
कानपुर नगर में लंबे समय तक तैनात रहे पुलिस उपाधीक्षक (DSP) ऋषिकांत शुक्ला पर आरोप है कि उन्होंने 10 वर्षों की अवधि में लगभग 100 करोड़ रुपये की संपत्ति खड़ी की।
सूत्रों के मुताबिक, इनमें से अधिकांश संपत्तियां बेनामी रूप में परिवार, सहयोगियों और साझेदारों के नाम पर दर्ज हैं।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, शुक्ला ने अपनी तैनाती के दौरान अवैध तरीकों से कमाई गई रकम से कई दुकानें, जमीनें और प्लॉट खरीदे।
इन संपत्तियों में कानपुर के आर्यनगर क्षेत्र में स्थित 11 दुकानें भी शामिल हैं, जो कथित तौर पर उनके करीबी सहयोगी देवेंद्र दुबे के नाम पर पंजीकृत हैं।
1998 में दारोगा के पद पर हुई थी ज्वाइनिंग
जानकारी के अनुसार, ऋषिकांत शुक्ला ने वर्ष 1998 में उपनिरीक्षक (दारोगा) के पद पर पुलिस विभाग में ज्वाइनिंग की थी।
वे 1998 से 2006 तक और फिर दिसंबर 2006 से 2009 तक लगातार कानपुर नगर में तैनात रहे।
यानी करीब 10 साल से अधिक समय तक उन्होंने कानपुर में ही अपनी पोस्टिंग बनाए रखी।
इसी अवधि के दौरान उन पर आर्थिक अनियमितताओं और बेनामी संपत्ति अर्जन के आरोप लगे।
शुरुआती शिकायतों के बाद मामले की जांच विशेष जांच टीम (SIT) को सौंपी गई थी।
SIT जांच में हुआ बड़ा खुलासा
SIT की जांच रिपोर्ट में यह पाया गया कि शुक्ला की घोषित आय के स्रोतों से इतनी बड़ी संपत्ति अर्जित करना संभव नहीं है।
रिपोर्ट में दर्ज विवरण के अनुसार,
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शुक्ला और उनके परिवार के नाम पर 12 संपत्तियों की कीमत लगभग 92 करोड़ रुपये आंकी गई है।
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तीन अन्य संपत्तियों के दस्तावेज जांच एजेंसियों को अब तक नहीं मिले हैं।
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कई संपत्तियां सहयोगियों और फर्जी नामों पर खरीदी गईं, ताकि आय का स्रोत छिपाया जा सके।
SIT की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि शुक्ला की करीबी दोस्ती अखिलेश दुबे नामक व्यक्ति से थी,
जो जमीन कब्जाने, वसूली और फर्जी मुकदमे दर्ज कराने जैसी गतिविधियों में लिप्त था।
पुलिस रिपोर्ट में गैंग के नेटवर्क का खुलासा
पुलिस आयुक्त, कानपुर नगर की रिपोर्ट में बताया गया है कि अखिलेश दुबे ने शहर में एक गिरोह बनाकर जमीन कब्जाने, अवैध वसूली और धमकी देने का नेटवर्क तैयार किया था।
इस गैंग के तार पुलिस, केडीए और अन्य सरकारी विभागों तक फैले हुए थे।
रिपोर्ट के अनुसार, ऋषिकांत शुक्ला भी इस गिरोह के साथ गठजोड़ में शामिल थे और उनसे आर्थिक लाभ उठाते रहे।
92 करोड़ की 12 संपत्तियों का विवरण, बाकी की जानकारी अधूरी
SIT रिपोर्ट के मुताबिक,
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कुल 15 संपत्तियों में से 12 की बाजार कीमत लगभग 92 करोड़ रुपये है।
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इनमें से कई वाणिज्यिक स्थानों पर स्थित हैं, जैसे आर्यनगर की दुकानें और शहर के पॉश इलाकों में प्लॉट।
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अन्य तीन संपत्तियों के कागज़ात अब तक जांच एजेंसियों को नहीं मिले, जिनकी कीमत का अनुमान करीब 8 से 10 करोड़ रुपये लगाया जा रहा है।
अब होगी सतर्कता (Vigilance) जांच, आगे की कार्रवाई तय
मामले की गंभीरता को देखते हुए, अपर पुलिस महानिदेशक (प्रशासन) ने रिपोर्ट को पुलिस महानिदेशक (DGP) उत्तर प्रदेश के पास भेजा है।
DGP की मंजूरी के बाद सतर्कता (विजिलेंस) जांच की संस्तुति की गई है।
विजिलेंस विभाग अब शुक्ला और उनके परिवार की संपत्तियों, बैंक खातों और निवेशों की विस्तृत जांच करेगा।
अधिकारी फिलहाल मैनपुरी जिले में पुलिस उपाधीक्षक (CO) के पद पर तैनात हैं,
जहां से उनके खिलाफ सभी दस्तावेज और अभिलेख मांगे जा रहे हैं।
विजिलेंस जांच पूरी होने के बाद उनके खिलाफ आर्थिक अपराध और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।
भ्रष्टाचार पर सख्त रुख की तैयारी में यूपी पुलिस
इस मामले के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है।
उच्चाधिकारियों ने साफ संकेत दिए हैं कि भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, विजिलेंस जांच में दोषी पाए जाने पर शुक्ला की सेवा समाप्ति और संपत्ति कुर्की की कार्रवाई भी संभव है।
निष्कर्ष: भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की उम्मीद
यूपी पुलिस के अधिकारी पर लगा यह आरोप विभाग की छवि के लिए बड़ा झटका है।
SIT रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि कानून के रखवाले ही जब नियमों का दुरुपयोग करने लगें,
तो जवाबदेही तय करना जरूरी हो जाता है।
अब सबकी नजर विजिलेंस जांच के नतीजों पर है, जो तय करेगी कि
क्या ऋषिकांत शुक्ला पर भ्रष्टाचार के आरोप साबित होते हैं या नहीं।
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